क्‍या है फरलो जिस पर रेप का दोषी गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आया, यह पैरोल से कितना अलग है?


दुष्कर्म और हत्या के मामले सजा काट रहा डेरा सच्‍चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को हरियाणा सरकार ने 21 दिन की फरलो (Furlough) दे दी है. वह हरियाणा में रोहतक की सुनारिया जेल में बंद था। फरलो एक छुट्टी की तरह है. पैरोल पर भी कैदी कुछ समय के लिए जेल से बाहर आते हैं. ऐसे में बड़ा सवाल है कि पैरोल (Parole) और फरलो में क्‍या फर्क है. इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पैरोल और फरलो में अंतर है. सजायाफ्ता कैदियों को दो तरह से रियायत दी जाती है। पहली पैरोल तथा दूसरी फरलो। 

क्‍या है पैरोल और फरलों में अंतर, कैदियों की रिहाई किस आधार पर दी जाती है और इससे जुड़ा क्‍या नियम है, जानिए इन सवालों के जवाब…

क्‍या होती है फरलो, पहले इसे समझें?

फरलो और पैरोल में एक ही समझी जाने वाली दो अलग-अलग बातें हैं. जैस- फरलो उन सजायाफ्ता कैदियों को दी जाती है जो लम्‍बे समय से सजा काट रहे हैं. फरलो की अवधि को कैदी की सजा में छूट और उसके अध‍िकार के तौर पर देखा जाता है. यह बिना किसी वजह के भी दी जा सकती है. फरलो देने का मकसद होता है कि कैदी परिवार और समाज के लोगों से मिल सके. जेल में लंबा समय बिताने के दौरान शरीर में हुई किसी तरह की बीमारी का इलाज करा सके या उससे असर से निपट सके.

क्‍या होती है पैरोल? 

पैरोल में सजायाफ्ता कैदी को कुछ शर्तों के साथ रिहाई दी जाती है. यह एक निश्‍चित अवधि के लिए होती है. कैदी के आचरण और रिकॉर्ड को देखने के बाद भी यह तय किया जाता है कि उसे पैरोल पर भेजा जाना है या नहीं. इसके अलावा समय-समय पर उसे रिपोर्ट भी करना पड़ता है जो साबित करता है कि कैदी भागा नहीं है. इसे एक सुधारात्‍मक प्रक्रिया माना जाता है. यानी एक तरह से कैदी को सुधार का मौका दिया जाता है. संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में उस कैदी को पैरोल लेने का आध‍िकार है जिसे कम से कम 18 महीने की सजा दी गई है और वह एक तिहाई सजा पूरी कर चुका है. वहीं भारत में पैरोल को कैदी के अध‍िकार के तौर पर नहीं देखा जाता है. कैदी की ओर से तमाम कारण दिए जाने के बाद भी पैरोल कैंसिल की जा सकती है. 

पैरोल को लेकर देश के राज्‍यों के अपने नियम हैं. जैसे- राजस्‍थान में  प्रारंभिक पैरोल 20 दिनों के लिए दी जाती है; दूसरी 30 दिनों के लिए और तीसरी 40 दिनों के लिए । इसके बाद कैदी स्थायी पैरोल के लिए आवेदन कर सकता है।

इन्‍हें नहीं दी जा सकती पैरोल

भारत में कारागार अध‍िनियम 1894 के तहत पैरोल दी जाती है. ऐसे कैदी जिन पर कई हत्‍याओं का आरोप है, आतंकवाद से जुड़ी गतिविधि में शामिल रहे हैं और उन पर UAPA लगा है, ऐसे कैदियों को पैरोल पर भी रिहाई नहीं दी जा सकती. सामान्‍य पैरोल के इतर, इमरजेंसी की स्थिति में जेल सुपरिटेंडेंट को 7 दिन की पैरोल देने का अध‍िकार होता है. 


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