April 30, 2026

ग्रामोत्थान के मल्टी-स्टेक होल्डर प्लेटफ़ॉर्म कार्यक्रम में सीएलएफ महिलाओं को सम्मानित किया ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने

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देहरादून- उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति (रीप) के अंतर्गत रूरल एंटरप्राइज एक्सीलरेशन प्रोजेक्ट (ग्रामोत्थान) द्वारा 9 एवं 10 फरवरी को देहरादून के एक निजी होटल में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मल्टी-स्टेकहोल्डर प्लेटफ़ॉर्म कार्यक्रम में ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम के दौरान ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए उत्तराखंड के विशेष एवं पारंपरिक उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले क्लस्टर लेवल फेडरेशन समूहों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर ग्राम्य विकास मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य स्तरीय एमएसपी जैसे आयोजन उत्तराखंड में ग्रामीण उद्यम पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने, सामुदायिक उद्यमों को बाजार में बेहतर पहचान दिलाने तथा सार्वजनिक निजी सामुदायिक साझेदारी को दीर्घकालिक रूप से बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और सीएलएफ के माध्यम से महिलाएं तेजी से आत्मनिर्भर बन रही हैं और लखपति दीदी अभियान अपने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में लगभग 30 निजी क्षेत्र की कंपनियों एवं उद्यमियों ने भाग लिया। इस दौरान परियोजना-स्तर, जिला-स्तर एवं सीएलएफ-स्तर पर निजी क्षेत्र के भागीदारों के साथ 60 से अधिक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए गए।

कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित प्रदर्शनी में उत्तराखंड के विशेष एवं पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया, जिनमें मंडुआ, झंगोरा जैसे मिलेट, काला सोयाबीन, तूर दाल, जीआई टैग उत्पाद बेडू (जैम एवं चटनी), मुंसियारी राजमा, ऐपन कला उत्पाद, हिमालयी घी, दून बासमती चावल, स्क्वैश, जैम, स्थानीय अचार तथा ऊनी एवं हैंडलूम उत्पाद शामिल रहे।

परियोजना निदेशक झरना कमठान ने बताया कि ग्रामोत्थान सहायतित परियोजना है, जो उत्तराखण्ड सरकार के सहयोग से ग्रामीण उद्यमों के विकास हेतु अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर केंद्रित है।

उन्होंने बताया कि परियोजना के अंतर्गत अब तक 6000 से अधिक व्यक्तिगत उद्यम एवं 500 से अधिक सामुदायिक आधारित संगठन स्तर के उद्यम स्थापित किए जा चुके हैं। यह परियोजना प्रदेश के 5.6 लाख परिवारों और 60 हजार स्वयं सहायता समूहों तक अपनी पहुंच बना रही है।

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